Introduction of c language in hindi | C Language का परिचय


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C Language का परिचय

आज हम कंप्यूटर और मोबाइल में जो सॉफ्टवेर या एप्लीकेशन में कार्य कर रहे है इन सबके पीछे लैंग्वेज का हाथ है और इन्ही लैंग्वेज में C Language अपना एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है.C Language के द्वारा बहुत से सॉफ्टवेर ऑपरेटिंग सिस्टम गेम्स का निर्माण हुआ है. C Language का परिचय कराने से पहले हमें language के बारे में जानने की आवश्यकता है. तो आईये हम language के बारे में जानने की कोशिश करते है

Language (भाषा) क्या है ?

लैंग्वेज दो या दो से अधिक व्यक्तियो के बीच सम्प्रेषण का माध्यम होती है. लैंग्वेज के माध्यम से व्यक्ति आपस में अपने विचारो का आदान प्रदान कर सकता है. कंप्यूटर एक इलेक्ट्रोनिक मशीन है जिसकी अपनी कोई भाषा नहीं है. कंप्यूटर को हमारे निर्देशों के पालन करने के लिए एक भाषा की आवश्यकता हुई अत कंप्यूटर में विद्युतीय मान के आधार पर एक भाषा की रचना की गई. कंप्यूटर लैंग्वेज सामान्यतया तीन प्रकार की होती है.

  • Low-Level Language
  • Assembly Language
  • High-Level Language

Low-Level Language : इस लैंग्वेज को मशीन लैंग्वेज भी कहते है इस लैंग्वेज में केवल ०,१ या   बाइनरी कोड का ही उपयोग किया जाता है. इस लैंग्वेज के लिए हार्डवेयर की जानकारी होना आवश्यक होती है. इस लैंग्वेज में बने प्रोग्राम में गलतिया सुधारने में बहुत अधिक समय लगता है तथा इसमें बनाये गए प्रोग्राम बहुत ही जटिल होते है.

Assembly Language : इस लैंग्वेज में सामान्य अंग्रेजी के शब्दों को लेकर प्रोग्राम बनाये जाते है यह भाषा मचिनी भाषा की अपेक्षाकृत सरल होती है तथा इस भाषा में प्रोग्राम बनाने के लिए सम्पूर्ण हार्डवेयर का ज्ञान होना आवश्यक है.

High-Level Language : इस लैंग्वेज में सामान्य बोलचाल या वातावरण में आने वाले अंग्रेजी शब्दों से प्रोग्राम बनाये जाते है ये प्रोग्राम बहुत सरल होते है जिसे कंप्यूटर जानने वाला सामान्य व्यक्ति भी बना सकता है. इसके साथ ऐसे प्रोग्राम होते जो इंग्लिश में लिखे गए कोड को मशीन Language के कोड में परिवर्तित करने का कार्य करते है. ये प्रोग्राम दो प्रकार के होते है.

  1. Interpreter : यह प्रोग्राम में लिखे गए कोड को एक एक लाइन में मशीन भाषा में कन्वर्ट करता है  इसमें यदि किसी लाइन में एरर आ जाती है तो यह अगली लाइन वाले कोड्स को रन नहीं करता है.
  2. Compilar : कम्पाइलर प्रोग्राम में लिखे गए पुरे कोड को एक बार में ही मशीन भाषा में कन्वर्ट करने का कार्य करता है तथा एरर आने पर लाइन के अनुसार लिस्ट में एरर प्रदर्शित करता है.

History of “C” Language

History of “C” Language : C भाषा से पहले प्रोग्राम Assembly Language में बनाये गए प्रोग्राम पोर्टेबल नहीं थे. इसी कमी को ध्यान में रखते हुए एक ऐसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की आवश्यक हुई जो पोर्टेबल हो अत 1960 में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी ने एक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का विकास किया जिसका नाम BCPL( Basic Combind Programming Language ) रखा गया. सन 1970मे Kan Thompson ने इस language मे कुछ सुधार किये और इसका नाम “B” Language रखा. C language का विकास सन 1972 मे अमेरिका के कंप्यूटर वैज्ञानिक Denish Richi ने AT&T Laboratory में किया. C लैंग्वेज एक बहुत ही शक्तिशाली भाषा है जिसमे सिस्टम व एप्लीकेशन सॉफ्टवेर दोनों तरह के प्रोग्राम बनाये जा सकते है. इस भाषा में सामान्य बोलचाल में आने वाले english शब्दों का प्रयोग किया जाता है अत यह भाषा सिखने व समझने में सरल है. यह भाषा एक structural programming language है अर्थात इसमें बनने वाले प्रोग्राम एक निश्चित क्रम में रन होते है.

 C भाषा की प्रमुख विशेषताएं

1 संरचनात्मक भाषा ( Structured Programming Language ) इस भाषा में किसी बड़ी समस्या को हल करने के लिए उसे छोटे – छोटे भागों में विभाजित किया जाता है । ये छोटे – छोटे भाग मॉडयूल्स कहलाते हैं । अतः ‘ सी ‘ एक संरचनात्मक प्रोग्रामिंग भाषा है ।

2 प्रोसीजरल भाषा ( Procedural Language ) वह भाषा जिसमें कथनों को नियम एवं क्रम के अनुसार लिखा जाता है , प्रोसीजरल भाषा कहलाती है । ‘ सी ‘ भाषा में निर्देश अथवा स्टेटमेंन्ट जिस क्रम में लिखे जाते हैं , वे उसी क्रम में क्रियान्वित ( Executc ) होते हैं । अतः ” सी ‘ एक प्रोसीजरल भाषा है ।

3 स्थानान्तरणीय भाषा ( Portable Language ) ‘ सी ‘ भाषा एक स्थानान्तरणीय भाषा है । अर्थात इस भाषा में किसी एक  computer के लिए लिखा गया प्रोग्रान दूसरे computer पर बिना किसी परिवर्तन या कुछ परिवर्तन के बाद रन हो जाता है । अतः ‘ सी ‘ एक उच्चस्तरीय स्थानान्तरणीय भाषा है ।

4 मध्यम स्तरीय भाषा ( Middle Level Language ) ‘ सी भाषा में उच्च स्तरीय तथा निम्न स्तरीय दोनों भाषाओं के गुणों का समावेश होता है । यह भाषा दो श्रेणियों के मध्य में होने के कारण इसे मध्यम स्तरीय भाषा भी कहा जाता है

5 केस सेन्सेटिव भाषा ( Case Sensitive Language ) इस भाषा में प्रोग्राम विकसित करने में प्रयोग किये जाने वाले छोटे अक्षरों ( Lower case ) तथा बड़े अक्षरों में भिन्नता होती है । दोनों ही प्रकार के अक्षरों का प्रयोग  प्रोग्राम की आवश्यकता  के आधार पर किया जाता है इसमें प्राय : प्रत्येक प्रोग्राम बनाने के लिए प्रयुक्त स्टेटमेन्ट्स छोटे अक्षरों में ही लिखे जाते है ।

6 संक्षिप्तता ‘ सी भाषा में लिखे जाने वाले प्रोग्राम संक्षिप्त . सरल एवं उच्च दक्षता ( High performance ) वाले होते है . जिन्हें आसानी से समझा जा सकता है । इनका परीक्षण करना एवं रखरखाव भी आसान होता है ।

7 उच्चस्तरीय भाषा ( High Level Language ) इस भाषा में लिखा गया प्रोग्राम यूजर की समस्या पर आधारित होता है । यूजर की समस्या समाधान के लिए प्राग्राम में अनेक फंक्शंस का प्रयोग किया जा सकता है तथा तैयार किये गये प्रोग्राम की गति भी अपेक्षाकृत आधक तीव्र होती है । इसके अलावा इसमें प्रोग्रामर अपनी आवश्यकतानुसार नये फंक्शन बना सकता  है। तथा इसमें प्रोग्राम को बहुत तेज गति से विकसित किया जा सकता है ।

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vikram

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